जनता की माँग – सरपंचों से पहले विधायकों और सांसदों के लिए आए रिकॉल बिल
जनता की माँग – सरपंचों से पहले विधायकों और सांसदों के लिए आए रिकॉल बिल

जनता की माँग – सरपंचों से पहले विधायकों और सांसदों के लिए आए रिकॉल बिल

  29 Aug 2020

हरियाणा राज्य की पंचायतों में अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है. दरअसल जनता द्वारा अब ‘राईट टू रिकॉल’ बिल की लगातार मांग उठ रही है. इससे पहले महिलाओं को केवल 50 प्रतिशत कोटा दिया जा रहा था लेकिन अब सरकार इस बिल को जल्द विधानसभा में लेकर आ रही है. इस नए बिल के आने से गाँव के ग्रामीणों के पास सरपंच को पद से हटाने का पूरा अधिकार होगा. हालाँकि इस बिल को मानसून से पहले ही लागू करने की बात सामने आई थी लेकिन किन्ही कारणों के चलते इसमें डिले कर दिया गया था. वहीँ अ एक बार फिर से जनता MP और MLA पदों के लिए राइट टू रिकॉल बिल की मांग कर रही है.

हाल ही में इस बारे में जानकारी देते हुए प्रदेश के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने बताया कि राइट टू रिकॉल बिल पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल का सपना था. उनका कहना था कि यदि कोई सरपंच जनता का विश्वास खो बैठता है तो बदले में जनता को अपना सरपंच दोबारा चुनने अ मौका मिलना चाहिए. दुष्यंत चौटाला ने कहा कि बहुत से पंचायती सरपंच अपने अहुदे का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं ऐसे में यदि वहां की जनता उन्हें उनके पद से हटाना चाहती है तो इसके लिए उन्हें एक मौका जरुर मिलना चाहिए. ऐसे में यदि राइट टू रिकॉल बिल बनता है तो ग्रामीण मतदाताओं को अपना अधिकार मिल जाएगा.

क्या है ये नया बिल?

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह ‘राइट टू रिकॉल बिल’ क्या है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसे साधारण भाषा में हम वोट वापसी कानून कह सकते हैं. बहुत से राज्यों में यह बिल पहले से पास किया जा चुका है जहाँ के ग्रामीण आपसी सहमती से अपना सरपंच कभी बदल सकते हैं.

इन राज्यों में पहले से लागू है राइट टू रिकॉल बिल

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • झारखंड
  • मध्य प्रदेश
  • छतीसगढ़
  • महाराष्ट्र
  • हिमाचल प्रदेश