रिटायर्ड गोरखा सैनिक अब जम्मू-कश्मीर में बना सकेंगे अपना घर
रिटायर्ड गोरखा सैनिक अब जम्मू-कश्मीर में बना सकेंगे अपना घर

रिटायर्ड गोरखा सैनिक अब जम्मू-कश्मीर में बना सकेंगे अपना घर

  07 Jul 2020  

जम्मू-कश्मीर: हाल ही में जम्मू-कश्मीर सरकार ने वहां रहने वाले लोगों के डोमिसाइल सर्टिफिकेट अर्थात मूल निवास प्रमाण पत्र बनाने शुरू कर दिए हैं. पिछले एक हफ्ते से शुरू किये गए इस अभियान में अब तक 6600 से अधिक लोगों को जम्मू में रहने का प्रमाण पत्र मिल चुका है. देखा जाए तो इन निवासियों में सबसे अधिक लोग गोरखा समुदाय के सैनिक और अफसर आते हैं. बता दें कि जिन लोगों को यहाँ रहने के लिए मूल निवास प्रमाण पत्र दिया गया है, वह अब जम्मु-कश्मीर में ज़मीन ले कर प्रॉपर्टी बना सकते हैं और साथ ही अब वह सब लोग शासित प्रदेश में नौकरी के लिए आवदेन कर सकेंगे.

इस बारे में जानकारी देते हुए जम्मू के अतिरिक्त राजस्व विजय कुमार शर्मा ने बताया कि अब तक यहाँ 5900 से ज्यादा लोगों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट दे दिए गए हैं. जबकि कश्मीर यह आंकड़ा 700 तक पहुँच गया है. इन सब लोगों में अधिकतर निवासी गोरखा सैनिक या अफसर ही हैं.

वहीँ दूसरी ओर जम्मू के तहसीलदार डॉक्टर रोहित शर्मा ने कहा कि केवल उनके इलाके में ही गोरखा समुदाय के लगभग 2500 लोग रह रहे हैं जिन्होंने भारतीय सेना में शामिल हो कर देश की सेवा की है. ऐसे में उन सब लोगों के परिवार वालों को यह प्रमाण पत्र मिल रहा है. हालाँकि इस विषय में अभी तक 3500 लोगों ने अप्लाई किया था जिसमे अधिकतर गोरखा समुदाय के लोग शामिल है जबकि कुछ वाल्मीकि समुदाय से ताल्लुक रखते हैं.

गौरतलब, है कि 1957 में वाल्मीकि समुदाय के लोगों को पंजाब से ला कर यहाँ बसाया गया था. यह फैसला उस समय इसलिए लिया गया था क्यूंकि तब राज्य के अधिकतर स्वच्छता कर्मी हड़तालों पर चले गए थे. ऐसे में चार संगठन उस समय प्रचलित थे जिनमे गोरखा समेत वाल्मीकि और पश्चिमी पाकिस्तान से आई औरतें शामिल थी. जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर में 18 तारिख को प्रमाण पत्र ज़ारी करने की बात कही गई थी. ऐसे में यदि कोई तहसीलदार 15 दिन के अंदर इन प्रमाण पत्रों को ज़ारी नहीं करता तो उसको 50 हज़ार रूपये का भरी जुर्माना लगाया जाएगा.

1 thought on “रिटायर्ड गोरखा सैनिक अब जम्मू-कश्मीर में बना सकेंगे अपना घर

  1. इस प्रकार किसी क्षेत्र की जातीय असन्तुलन की स्थिति पैदा कर मामले को और पेचीदा करने का प्रयास न किया जाए ,जम्मू कश्मीर के लोग इससे असहज महसूस करेंगे ,यहाँ बात हिन्दू मुसलमान की नही है ऐसा करके सरकार कश्मीर के साथ वही सुलूक कर रही है जो पाकिस्तान सरकार ने वहां कश्मीर और बलोचिस्तान के साथ किया है हर किसी को अपनी भाषा सँस्कृति से प्यार लगाव होता है

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